बालाघाट जिले के दुर्गम नक्सल प्रभावित गांव पालादी में जिला प्रशासन द्वारा विशेष शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें स्वयं कलेक्टर मृणाल मीणा उपस्थित रहे। यह शिविर शासन की योजनाओं के प्रचार-प्रसार, ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान और आत्मसमर्पण नीति को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। शिविर में ग्रामीणों ने बिजली, नेटवर्क, पेंशन, आधार और आंगनबाड़ी जैसी कई समस्याएं सीधे कलेक्टर को बताईं।
ग्रामीणों को मिली उम्मीद, समस्याओं का जल्द होगा समाधान
शिविर में कलेक्टर से मिलने आए ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार किसी कलेक्टर ने गांव में आकर उनकी बात सुनी है। कुछ ने स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कराया, तो कुछ ने ज़मीन से जुड़े पट्टों की बात रखी। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि 8 से 15 दिनों के भीतर कई समस्याओं का निराकरण कर दिया जाएगा।

17 विभागों की मौजूदगी में समाधान की पहल
मुख्यालय से 40 किमी दूर इस शिविर में 17 विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कैंप में वृद्धजनों, दिव्यांगों, किसानों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर तत्काल कार्यवाही की गई। कलेक्टर ने साफ कहा कि हर पंद्रह दिन में नक्सल और आदिवासी बाहुल्य गांवों में शिविर लगाकर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
आत्मसमर्पण नीति का प्रचार, पुलिस-प्रशासन का संयुक्त संदेश
आईजी संजय सिंह ने ग्रामीणों से अपील की कि वे नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए समझाएं। मध्यप्रदेश सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत न केवल सुरक्षा, बल्कि रोजगार और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद का कोई भविष्य नहीं है और सरकार इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस शिविर के माध्यम से प्रशासन ने न सिर्फ सेवाएं पहुंचाईं बल्कि ग्रामीणों के मन में भरोसा भी जगाया कि सरकार उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर है।
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