देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी और जननायक बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बालाघाट जिले भर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। नगर के बिरसा मुंडा चौक पर स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। इस अवसर पर आदिवासी विकास परिषद द्वारा “जल, जंगल, जमीन” के रक्षक महामानव बिरसा मुंडा का शहादत दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम में सामाजिक एकता का संदेश
कार्यक्रम का आयोजन जिला चिकित्सालय के सामने बिरसा मुंडा चौक पर किया गया, जहां सर्वप्रथम आदिवासी समाज के लोगों ने प्रतिमा की पूजा कर माल्यार्पण किया। इसके पश्चात बिरसा मुंडा की जीवनगाथा और उनके बलिदान पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने उनकी वीरता को याद किया।
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अंत में सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मोमबत्ती प्रज्वलित कर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही, उपस्थित जनसमूह ने उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया और सामाजिक एकता की प्रेरणा साझा की।
बिरसा मुंडा की प्रेरणादायक जीवनगाथा
बता दें कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के रांची जिले के उलीहातू गांव में सुगना मुंडा और कर्मी हातू के घर हुआ था। उन्होंने अंग्रेजों के शोषण और अन्याय के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट कर संघर्ष का मार्ग दिखाया। इस अवसर पर आदिवासी विकास परिषद, आज़ा ब्रिगेड, अर्पित सेवा संस्था, भीम आर्मी और बहुजन समाज पार्टी के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
नवयुवकों को मिला नया दिशा-बोध
कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे बिरसा मुंडा के पदचिह्नों पर चलते हुए समाज की सुरक्षा और व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाएं। युवाओं को सामाजिक बदलाव के लिए कार्य योजना बनाकर एक नई दिशा देने की बात कही गई। कार्यक्रम में उपस्थित सभी वर्गों ने महामानव बिरसा मुंडा को भगवान स्वरूप मानते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया।
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