मंगलवार को बालाघाट में संस्कृत शिक्षकों ने नई शिक्षा नीति 2020 में संस्कृत की अनदेखी को लेकर कलेक्टरेट पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने संस्कृत भाषा में नारे लगाते हुए मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा और मांग की कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक संस्कृत को अनिवार्य विषय बनाया जाए।
संस्कृत को हटाकर व्यवसायिक शिक्षा का बढ़ावा, शिक्षकों में नाराजगी
संस्कृत के उच्च माध्यमिक शिक्षक कोमल प्रसाद ठाकरे ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्कूलों में संस्कृत के स्थान पर व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषाओं की जननी है और इसकी उपेक्षा करना हमारी सांस्कृतिक विरासत का अपमान है।
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हरियाणा बोर्ड का उदाहरण और त्रिभाषा सूत्र की अनदेखी
शिक्षकों ने हरियाणा बोर्ड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां त्रिभाषा सूत्र के तहत संस्कृत को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन मध्यप्रदेश में त्रिभाषा सूत्र का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है, जो नई शिक्षा नीति के अनुच्छेद 4.1, 4.12, 4.13, 4.15, 4.17, 22.8, 22.15 और 22.17 का उल्लंघन है।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने मांग की कि कक्षा 9वीं एवं 10वीं में त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत संस्कृत को अनिवार्य विषय बनाया जाए। साथ ही, व्यवसायिक शिक्षा को वैकल्पिक नहीं बल्कि सातवें विषय के रूप में जोड़ा जाए। कक्षा 11वीं और 12वीं में संस्कृत विषय चुनने वाले छात्रों के लिए अंग्रेज़ी को अतिरिक्त विषय के रूप में शामिल करने की भी मांग की गई।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे व्यवसायिक शिक्षा के विरोधी नहीं हैं, लेकिन संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए उसे विकल्प नहीं, अनिवार्यता का दर्जा मिलना चाहिए। प्रशासन से इस पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई है।
मेरा नाम भूमेन्द्र बिसेन है। मैं TazaSanket.in का संस्थापक और एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूं। इस पोर्टल के जरिए मैं मध्य प्रदेश, खासकर बालाघाट की विश्वसनीय लोकल खबरें पहुंचाता हूं। डिजिटल पत्रकारिता में मुझे 4 वर्षों का अनुभव है और मेरा उद्देश्य समाज की सच्चाई को उजागर करना है।





