हाल ही में OBC आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से एक हलफनामा (एफिडेविट) मांगा गया है। कोर्ट ने पूछा है कि 13% आरक्षित पदों पर नियुक्तियों को होल्ड पर क्यों रखा गया है और इसमें क्या समस्याएं आ रही हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार से इसका स्पष्ट जवाब मांगा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा बयान
इस संदर्भ में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का एक अहम बयान सामने आया है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी सरकार 27% OBC आरक्षण को लेकर पूरी तरह कटिबद्ध है। सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि OBC आरक्षण से जुड़े सभी तथ्यों का समावेश करते हुए एक तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जाए। यह रिपोर्ट विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में टेबल की जाएगी, जिसके बाद सरकार इस मुद्दे पर कोई बड़ा निर्णय ले सकती है।

कांग्रेस पर निशाना, प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा
मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए कहा कि 2019 में कमलनाथ सरकार ने बिना किसी ठोस सर्वे या तैयारी के OBC आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% कर दिया था। इस जल्दबाजी ने न सिर्फ भ्रम की स्थिति उत्पन्न की, बल्कि यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया। इसका सीधा नुकसान उन छात्रों और अभ्यर्थियों को हुआ, जिन्हें आज तक नियुक्ति या दाखिला नहीं मिल पाया।
लंबित मामलों का जल्द निराकरण
मोहन यादव ने यह भी कहा कि जो छात्र और अभ्यर्थी कोर्ट की प्रक्रिया के कारण जॉइनिंग से वंचित रह गए हैं, सरकार उन्हें शीघ्र नियुक्ति दिलाने का प्रयास करेगी। साथ ही, प्रमोशन और अन्य लंबित मामलों का भी जल्द निराकरण किया जाएगा।
निष्कर्ष
OBC आरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश सरकार अब पूरी योजना और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। आने वाले विधानसभा सत्र में यह मुद्दा निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है, जिससे लाखों OBC वर्ग के छात्रों और युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
मेरा नाम भूमेन्द्र बिसेन है। मैं TazaSanket.in का संस्थापक और एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूं। इस पोर्टल के जरिए मैं मध्य प्रदेश, खासकर बालाघाट की विश्वसनीय लोकल खबरें पहुंचाता हूं। डिजिटल पत्रकारिता में मुझे 4 वर्षों का अनुभव है और मेरा उद्देश्य समाज की सच्चाई को उजागर करना है।







