Balaghat News: बालाघाट जिले के ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बालिकाओं के जीवन में एक नई उम्मीद जगी है। कलेक्टर मृणाल मीणा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा युवाओं को देश की प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार दिलाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 6 नवंबर को 150 बालिकाओं को बेंगलुरु के लिए रवाना किया गया, जिन्हें कलेक्टर मृणाल मीणा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ, एसडीएम गोपाल सोनी, नगर पालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर, पूर्व अध्यक्ष रमेश रंगलानी, शिक्षाविद लता एलकर, अभय सेठिया, आशीष मिश्रा, तपेश असाटी और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

रोजगार मेले से शुरू हुआ नया सफर
जिला प्रशासन ने 28 अक्टूबर को शांतिपनी विद्यालय बालाघाट में रोजगार मेले का आयोजन किया था। इसमें टाटा मोटर्स और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों को आमंत्रित किया गया था। मेले में 1500 से अधिक युवाओं का इंटरव्यू लिया गया, जिनमें से 150 बालिकाओं का चयन हुआ।
इनमें से कई बालिकाएं नक्सल प्रभावित इलाकों से हैं, जैसे कि मलाजखंड के टिंगीपुर, वारासिवनी के खापा, किन्नापुर के अकोला, कटंगी के नवेगांव और लालबरा के बिरसोला-बहरहा टिकुर गांव। ये बालिकाएं अब बेंगलुरु की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में अपना नया जीवन शुरू करने जा रही हैं।
गांव की बेटी से टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल तक का सफर
मंडला जिले की नैनपुर की रहने वाली मुस्कान ने बताया कि कलेक्टर सर के रोजगार मेले के माध्यम से उनका चयन Apple मोबाइल निर्माण इकाई (Tata Electronics) में हुआ है। मुस्कान ने कहा, “पहले गांव में रोजगार की सुविधा नहीं थी। ग्रेजुएशन के बाद भी नौकरी नहीं मिल पा रही थी। अब इस अवसर से न केवल आत्मनिर्भर बनूंगी बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुधार सकूंगी।”
मलाजखंड क्षेत्र की किरण मरावी और वारासिवनी की रवीना व करिश्मा लांजेवार जैसी बालिकाएं भी इस अवसर से बेहद खुश हैं। किरण ने कहा, “हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। यह नौकरी हमारे लिए उम्मीद की नई किरण है।”
कलेक्टर मृणाल मीणा का विजन: आत्मनिर्भर बालाघाट
कलेक्टर मृणाल मीणा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं को बेंगलुरु में नौकरी मिलने से न केवल उनका भविष्य सुरक्षित होगा, बल्कि उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार और जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि “पिछले वर्ष 2000 युवाओं को रोजगार के अवसर मिले थे, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 4000 के करीब पहुंच चुकी है।”
उन्होंने आगे कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य है कि नक्सल प्रभावित इलाकों की युवतियों को ऐसे प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए, जहां उन्हें ट्रेनिंग, स्टाइपेंड और डिप्लोमा की सुविधा भी मिले।
निरंतर प्रयासों से खुल रहे रोजगार के नए द्वार
कलेक्टर मीणा ने बताया कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बाद अब प्रशासन Foxconn (Foxel) और अन्य प्रमुख कंपनियों से संपर्क में है ताकि युवाओं को और अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता है कि हर 10 दिन में 100 से अधिक युवाओं को रोजगार मिले। प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाएं और जनप्रतिनिधि मिलकर इस दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।”
ग्रामीण स्तर पर माइक्रो प्लानिंग से मिली सफलता
साईं कंप्यूटर एजुकेशन के संचालक आशीष मिश्रा ने बताया कि इस मिशन की सफलता के पीछे सूक्ष्म स्तर पर की गई योजना है। उन्होंने कहा, “हमने गांवों में जाकर सरपंच और सचिवों के माध्यम से बेरोजगार युवाओं की पहचान की। पहले जो बच्चे पढ़ाई में व्यस्त थे, उन्हें नहीं बल्कि वे बच्चे जो गांव में बेरोजगार थे, उन्हें रोजगार दिलाने की दिशा में कार्य किया गया।”
उन्होंने आगे बताया कि “आज 110 से अधिक बालिकाएं बेंगलुरु के लिए रवाना हो रही हैं। उनके माता-पिता बेहद खुश हैं क्योंकि अब उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल है।”
निष्कर्ष: बालाघाट की बेटियों ने रचा नया इतिहास
कलेक्टर मृणाल मीणा के नेतृत्व में बालाघाट जिले का यह रोजगार अभियान अब एक प्रेरक मॉडल बन गया है। नक्सल प्रभावित इलाकों से निकली ये बेटियां अब Apple जैसे ग्लोबल ब्रांड के लिए काम करेंगी। यह सिर्फ एक रोजगार की कहानी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता कदम है, जिसने सैकड़ों परिवारों के जीवन में उम्मीद, आत्मविश्वास और सम्मान की नई रोशनी जलाई है।
मेरा नाम भूमेन्द्र बिसेन है। मैं TazaSanket.in का संस्थापक और एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूं। इस पोर्टल के जरिए मैं मध्य प्रदेश, खासकर बालाघाट की विश्वसनीय लोकल खबरें पहुंचाता हूं। डिजिटल पत्रकारिता में मुझे 4 वर्षों का अनुभव है और मेरा उद्देश्य समाज की सच्चाई को उजागर करना है।





