महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का बड़ा आदेश सामने आया है। RBI ने उन्हें लातूर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (Latur DCC Bank) के निदेशक पद से हटाने का निर्देश दिया है। मामला सहकारी बैंक के निदेशक के लगातार कार्यकाल की वैधानिक सीमा से जुड़ा है।
पाटिल ने RBI के फैसले को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा है कि वह इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। ऐसे में यह मामला अब कानूनी स्तर पर भी आगे बढ़ सकता है।
बाबासाहेब पाटिल पर RBI की कार्रवाई क्यों हुई?
RBI के अनुसार, पाटिल की Latur DCC Bank के निदेशक के तौर पर लगातार अवधि निर्धारित वैधानिक सीमा से अधिक हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पाटिल ने इस पद पर 39 साल से अधिक समय बिताया है।
RBI ने बैंक को उन्हें तत्काल निदेशक पद से हटाने का निर्देश दिया। यह कार्रवाई बैंक के निदेशकों के कार्यकाल से जुड़े Banking Regulation Act के प्रावधानों के तहत की गई है।
शिकायत के बाद शुरू हुआ पूरा मामला
मामले की शुरुआत 25 मई 2026 को हुई, जब लातूर निवासी सतीश शेषराव जाधव ने RBI के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में पाटिल समेत आठ निदेशकों पर निर्धारित कार्यकाल सीमा पार करने का आरोप लगाया गया था।
इसके बाद मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच तक पहुंचा। 3 अगस्त को अदालत ने सक्षम प्राधिकारी को शिकायत पर उसके गुण-दोष के आधार पर निर्धारित अवधि में फैसला लेने का निर्देश दिया था।
RBI द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद आठ में से सात निदेशकों ने इस्तीफा दे दिया। पाटिल ने पद छोड़ने के बजाय नियामक के सामने अपना पक्ष रखा।
कार्यकाल की सीमा पर क्या है विवाद?
सहकारी बैंकों के निदेशकों के लगातार कार्यकाल को लेकर Banking Regulation Act में संशोधित प्रावधान लागू हैं। RBI के अनुसार, संबंधित प्रावधानों के तहत कुछ परिस्थितियों में निदेशक का लगातार कार्यकाल 10 साल तक सीमित है।
पाटिल ने RBI के सामने तर्क दिया था कि 2021 में चुने गए मौजूदा निदेशकों पर इस सीमा को इस तरह लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त होने वाला है।
RBI ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। नियामक के अनुसार, किसी निदेशक के कार्यकाल का कुछ हिस्सा नए प्रावधान के लागू होने से पहले का होने मात्र से मौजूदा प्रावधान को पिछली तारीख से लागू करना नहीं माना जाता।
पाटिल ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही
RBI के आदेश के बाद बाबासाहेब पाटिल ने फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें संबंधित प्रावधान के तहत हटाया नहीं जा सकता और वह अपनी क्षमता में हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
इसलिए फिलहाल RBI का आदेश लागू है, जबकि पाटिल की ओर से कानूनी चुनौती की बात सामने आई है। आगे की स्थिति अदालत में होने वाली कार्यवाही और संबंधित आदेशों पर निर्भर करेगी।
सहकारी बैंकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
यह मामला महाराष्ट्र के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में लंबे समय से निदेशक पद संभाल रहे लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, कई स्थानीय राजनीतिक नेता लंबे समय से सहकारी बैंक बोर्डों से जुड़े रहे हैं।
RBI की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि सहकारी बैंकों के निदेशक पद पर कार्यकाल से जुड़े नियामकीय प्रावधानों का पालन महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रत्येक मामले की स्थिति संबंधित निदेशक के कार्यकाल और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।
निष्कर्ष
RBI ने बाबासाहेब पाटिल को Latur District Central Cooperative Bank के निदेशक पद से हटाने का निर्देश दिया है। कार्रवाई लगातार कार्यकाल की वैधानिक सीमा से जुड़े प्रावधानों के आधार पर की गई है।
पाटिल ने RBI के फैसले को चुनौती देने की बात कही है। इसलिए मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी। यह घटनाक्रम महाराष्ट्र के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में निदेशकों के कार्यकाल से जुड़े नियमों पर भी ध्यान केंद्रित करता है।