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Smart TV पर Free Internet TV देखने वालों को झटका? TRAI ने लाइसेंस और नए नियमों का दिया प्रस्ताव - Taza Sanket

Smart TV पर Free Internet TV देखने वालों को झटका? TRAI ने लाइसेंस और नए नियमों का दिया प्रस्ताव

भारत में स्मार्ट टीवी पर मुफ्त लाइव टीवी चैनल देखने वाले यूजर्स के लिए भविष्य में कुछ नियम बदल सकते हैं। Smart TV Free Channels Rules को लेकर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने नए प्रस्ताव पेश किए हैं। इनके तहत इंटरनेट के जरिए मुफ्त विज्ञापन वाले टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स को सरकारी अनुमति लेनी पड़ सकती है। Samsung TV Plus और LG Channels जैसे ऐप इस तरह की सेवाओं के उदाहरण हैं। हालांकि, ये अभी केवल सिफारिशें हैं, अंतिम नियम नहीं।

Smart TV Free Channels Rules: क्या है TRAI का प्रस्ताव?

TRAI ने सोमवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को अपनी सिफारिशें भेजीं। मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में केबल ऑपरेटरों की शिकायतों के बाद इस विषय पर सुझाव मांगे थे। ऑपरेटरों का कहना था कि इंटरनेट पर ऐसे चैनल बिना लाइसेंस के चल रहे हैं।

TRAI ने इस सेवा के लिए “Application-based Linear Television Distribution” नाम का व्यापक वर्ग प्रस्तावित किया है। इसका उद्देश्य इंटरनेट पर विज्ञापन के साथ मुफ्त टीवी चैनल उपलब्ध कराने वाली सेवाओं के लिए नियम तय करना है।

ऐप चलाने के लिए लेना पड़ सकता है लाइसेंस

प्रस्ताव के अनुसार, ऐसी सेवा चलाने वाले ऐप प्रदाताओं को Telecommunications Act, 2023 के तहत राष्ट्रीय प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी। प्रस्तावित अनुमति की अवधि 20 साल और शुरुआती शुल्क एक लाख रुपये रखने की सिफारिश की गई है।

मंत्रालय से पहले से अनुमति प्राप्त टीवी चैनलों को इन ऐप्स पर दिखाने के लिए अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, केवल ऐप के लिए बनाए गए नए चैनलों को मंत्रालय में पंजीकरण कराना होगा। ऐसे गैर-समाचार चैनलों के लिए एक लाख रुपये सालाना शुल्क प्रस्तावित है।

News Channels के लिए अलग नियम

TRAI ने समाचार और समसामयिक मामलों से जुड़े चैनलों के लिए अलग व्यवस्था का सुझाव दिया है। उसके अनुसार, समाचारों का सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।

इसी कारण केवल इंटरनेट पर चलने वाले नए न्यूज चैनलों को आसान पंजीकरण व्यवस्था देने के बजाय मौजूदा अनुमति प्रक्रिया के दायरे में रखने की सिफारिश की गई है।

विदेशी कंपनियों को भारत में अपनी सेवाएं संचालित करने के लिए भारतीय इकाई के माध्यम से काम करना पड़ सकता है।

स्मार्ट टीवी कंपनियों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

प्रस्ताव में स्मार्ट टीवी निर्माता कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम प्रदाताओं की जिम्मेदारी भी तय करने की बात कही गई है। उन्हें मंत्रालय की अधिकृत ऐप सूची में शामिल नहीं होने वाले ऐप्स को हटाना या निष्क्रिय करना पड़ सकता है।

यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो कुछ कम लोकप्रिय ऐप्स पर उपलब्ध मुफ्त चैनल प्रभावित हो सकते हैं। खासकर उन यूजर्स को परेशानी हो सकती है, जो बजट स्मार्ट टीवी पर ऐसे ऐप्स के जरिए टीवी देखते हैं।

दर्शकों को क्या फायदा और क्या परेशानी होगी?

TRAI का प्रस्ताव मुफ्त टीवी देखने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बारे में नहीं है। इसका मकसद इन सेवाओं के लिए लाइसेंसिंग और जवाबदेही का ढांचा तैयार करना है।

प्रस्ताव लागू होने पर दर्शकों को किसी आपत्तिजनक कार्यक्रम या भ्रामक विज्ञापन की शिकायत करने के लिए भारत में नामित शिकायत अधिकारी मिल सकता है। यह व्यवस्था केबल और DTH सेवाओं में उपलब्ध शिकायत प्रक्रिया जैसी होगी।

दूसरी ओर, यदि कोई ऐप अधिकृत सूची में शामिल नहीं होता, तो उस पर उपलब्ध चैनलों तक पहुंच बंद हो सकती है। हालांकि, अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार सिफारिशों को किस रूप में स्वीकार करती है।

टीवी रेटिंग और विज्ञापन पर भी पड़ सकता है असर

TRAI ने सुझाव दिया है कि इन ऐप्स पर होने वाली दर्शक संख्या को टीवी रेटिंग में शामिल किया जाए। विज्ञापनदाता टीवी रेटिंग के आधार पर तय करते हैं कि उन्हें किस प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देना है।

यदि इंटरनेट आधारित मुफ्त टीवी सेवाओं की दर्शक संख्या को रेटिंग में शामिल किया जाता है, तो विज्ञापन बाजार में इन प्लेटफॉर्म की भूमिका बदल सकती है।

हालांकि, पेड चैनलों की कीमत, चैनल दिखाने के शुल्क और सेवा की गुणवत्ता से जुड़े नियमों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। TRAI के मुताबिक, लाइसेंसिंग ढांचा तय होने के बाद इन मुद्दों पर आगे विचार किया जा सकता है।

भारत में तेजी से बढ़ रहा Connected TV का बाजार

TRAI की रिपोर्ट में दिए गए उद्योग अनुमानों के अनुसार, भारत में 19.3 करोड़ से अधिक टेलीविजन घर हैं। इस आंकड़े में केबल, DTH, HITS, फ्री-टू-एयर सेवाएं और कनेक्टेड टीवी शामिल हैं। रिपोर्ट में इंटरनेट सब्सक्राइबर की संख्या एक अरब से अधिक बताई गई है।

एक उद्योग रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में कनेक्टेड टीवी दर्शकों की संख्या 12.9 करोड़ से अधिक हो गई थी। एक अन्य अनुमान में मुफ्त विज्ञापन आधारित स्ट्रीमिंग टीवी यानी FAST सेवाओं के यूजर्स की संख्या 2023 के लगभग 11.6 करोड़ से बढ़कर 2027 तक करीब 14.9 करोड़ होने की संभावना जताई गई है।

अभी अंतिम नियमों का इंतजार

TRAI को अप्रैल में जारी परामर्श पत्र पर 207 प्रतिक्रियाएं मिली थीं। प्राधिकरण का कहना है कि सिफारिशों का उद्देश्य नई तकनीक और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन बनाना है।

फिलहाल इन प्रस्तावों को लागू करने का अंतिम निर्णय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को लेना है। मंत्रालय की मंजूरी और नियमों की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा कि स्मार्ट टीवी पर मुफ्त इंटरनेट टीवी चैनल चलाने वाले ऐप्स के लिए कौन-सी शर्तें अनिवार्य होंगी।

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