Balaghat News: बालाघाट जिले से लगे ग्राम आमलाजरी में पेट्रोल पंप के सामने स्थित एक पुराने नाले को बंद कर दिया गया, जिसके चलते किसानों के खेतों में पानी भर गया। ग्रामीणों ने बताया कि नाले को एक कॉलोनाइज़र द्वारा अवैध रूप से बंद कर दिया गया है। यह नाला क्षेत्र की जल निकासी का प्रमुख मार्ग था, और इसके बंद होने से बारिश का पानी खेतों में भरकर फसलों को बर्बाद कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यह नाला करीब 100 साल पुराना है और लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई और जल निकासी में अहम भूमिका निभाता रहा है।
प्रशासन को दी गई थी कई बार शिकायत
स्थानीय रहवासियों ने बताया कि इस समस्या को लेकर वे कई बार तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर और नगर पालिका तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। साथ ही सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिणामस्वरूप, खेतों में लगातार 15 दिनों से पानी जमा होने से 1000 एकड़ तक की फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी हैं।
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पूर्व सांसद और विधायक पहुंचे समर्थन में
5 जुलाई को किसानों और ग्रामीणों ने पेट्रोल पंप के सामने चक्काजाम कर विरोध जताया। इस प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही पूर्व सांसद कंकर मुंजारे और बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे मौके पर पहुंचे। विधायक ने कहा कि बालाघाट में पिछले एक दशक से अवैध कॉलोनियों का अंबार लग गया है, और प्रशासन की लापरवाही के चलते यह संकट उत्पन्न हुआ है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रशासन को वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए नाले को तत्काल खोलना चाहिए।
तहसीलदार की मौजूदगी में खुलवाया गया नाला
किसानों के आक्रोश और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच अंततः तहसीलदार भूपेंद्र अहिरवार की उपस्थिति में जेसीबी मशीन के माध्यम से नाले को दोपहर 2 बजे के आसपास खुलवाया गया। तहसीलदार ने बताया कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और राजस्व रिकॉर्ड में यह नाला दर्ज नहीं है, फिर भी किसानों की फसलें बर्बाद न हों, इसीलिए तात्कालिक रूप से नाला खोला गया है। साथ ही, संबंधित कॉलोनाइज़र को नोटिस जारी कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
ग्रामीणों को मिली अस्थायी राहत
करीब तीन घंटे चले चक्काजाम के बाद नाला खोलने से किसानों को कुछ राहत मिली है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन स्थायी समाधान करे। उनका कहना है कि जब तक नाले की पूरी तरह से सफाई और जल निकासी सुनिश्चित नहीं होती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
निष्कर्ष
यह घटना न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस प्रकार से अवैध कॉलोनाइज़ेशन और सरकारी रिकॉर्ड की खामियों के चलते हजारों किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाती है। प्रशासन को चाहिए कि वह न सिर्फ इस समस्या का स्थायी हल निकाले, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाए।
मेरा नाम भूमेन्द्र बिसेन है। मैं TazaSanket.in का संस्थापक और एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूं। इस पोर्टल के जरिए मैं मध्य प्रदेश, खासकर बालाघाट की विश्वसनीय लोकल खबरें पहुंचाता हूं। डिजिटल पत्रकारिता में मुझे 4 वर्षों का अनुभव है और मेरा उद्देश्य समाज की सच्चाई को उजागर करना है।





