बालाघाट जिले का गठन 1867 में भंडारा, मंडला और सिवनी जिलों के कुछ हिस्सों को मिलाकर किया गया था। इसका मुख्यालय मूल रूप से गुहा या बुधा कहलाता था, लेकिन समय के साथ यह नाम प्रचलन से बाहर हो गया और अब इसे बालाघाट के नाम से जाना जाता है। यह जिला छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमाओं के पास स्थित है। बालाघाट में व्यंगंगा नदी बहती है और यहां भारत की सबसे बड़ी तांबे (कॉपर) की खदान, मलाजखंड, मौजूद है। यह जिला जबलपुर संभाग के अंतर्गत आता है और इसमें कुल दस तहसीलें हैं – बालाघाट, बैहर, बिरसा, परसवाड़ा, नारंगी, वारासिवनी, लालबर्रा, खैरलांजी, लांजी और किरणापुर।
बालाघाट के प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थल
बालाघाट जिले में अनेक प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जहां पर्यटक आकर अपने जीवन के खूबसूरत पल बिता सकते हैं। यहां के जंगल, पहाड़, झरने और ऐतिहासिक मंदिर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। आइए जानते हैं बालाघाट के सबसे प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट्स के बारे में, जहां आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ इस साल पिकनिक मना सकते हैं।
नहले सारा बांध की खूबसूरती

नहले सारा बांध बालाघाट जिले की एक खूबसूरत जगह है। यह चंदन नदी पर बना एक पुराना बांध है, जो बालाघाट से करीब 58 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय बरसात के मौसम में होता है, जब बांध का पानी पूरे प्रवाह में बहता है और चारों तरफ हरियाली का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यह जगह प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।
धोती डैम का रमणीय दृश्य

धोती डैम बालाघाट जिले का एक दर्शनीय स्थल है, जो बालाघाट से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बरसात के मौसम में जब डैम ओवरफ्लो होता है, तो इसके ऊपर से गिरता पानी झरने जैसा लगता है, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। नए वर्ष के समय यहां सैलानियों की भीड़ उमड़ती है। इस डैम का निर्माण अंग्रेजों के समय हुआ था और इसके आसपास का प्राकृतिक दृश्य बहुत ही आकर्षक है। यह स्थान स्थानीय लोगों के लिए एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट बन चुका है।
गांगुलपारा वाटरफॉल का अद्भुत आकर्षण

गांगुलीपार वाटरफॉल बालाघाट का एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है, जो घने जंगलों के बीच स्थित है। यह झरना बालाघाट से करीब 16 किलोमीटर दूर है और यहां तक पहुंचने के लिए मुख्य सड़क से थोड़ा पैदल चलना पड़ता है। बरसात और नए वर्ष के समय इस झरने का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। पहाड़ियों से गिरता हुआ पानी और आसपास की हरियाली इस स्थान को बेहद आकर्षक बनाते हैं। यह जगह प्राकृतिक प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान है।
बजरंग घाट का धार्मिक और प्राकृतिक महत्व

बजरंग घाट बालाघाट जिले का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो व्यंगंगा नदी के किनारे स्थित है। यहां हनुमान जी का एक प्राचीन मंदिर है, जो जंगलों से घिरा हुआ है। बरसात के मौसम में व्यंगंगा नदी में जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे इस स्थान की सुंदरता और बढ़ जाती है। बजरंग घाट के आसपास कई छोटे-छोटे स्थान हैं, जहां पर्यटक पिकनिक मना सकते हैं। नए वर्ष और त्योहारों के समय यहां काफी चहल-पहल रहती है।
रामराम वाटरफॉल का जादुई सौंदर्य

रामराम वाटरफॉल बालाघाट के वारासिवनी तहसील से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्थान सतपुड़ा की हरी-भरी पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। यहां के झरनों की संख्या इतनी अधिक है कि एक बार आने के बाद पर्यटक बार-बार लौटना चाहते हैं। पहाड़ियों के बीच कलकल बहते झरने, हरियाली और संकरे रास्ते इसे और भी मनोहारी बना देते हैं।
यहां एक गुफा में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जहां झरने का पानी निरंतर अभिषेक करता रहता है। इसे महादेव पाठ रामराम के नाम से भी जाना जाता है। नए वर्ष पर यहां की भीड़ देखते ही बनती है, जब आसपास के जिलों और राज्यों से लोग पिकनिक मनाने के लिए यहां आते हैं।
निष्कर्ष
बालाघाट जिले में प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व से भरपूर अनेक स्थल मौजूद हैं, जो पिकनिक और घुमक्कड़ी के शौकीनों के लिए स्वर्ग समान हैं। अगर आप इस वर्ष पिकनिक की योजना बना रहे हैं, तो नहले सारा बांध, धोती डैम, गांगुलीपार वाटरफॉल, बजरंग घाट और रामराम वाटरफॉल जैसे स्थलों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। इन स्थानों पर आकर आप न केवल प्रकृति की गोद में समय बिता सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का अनुभव भी कर सकते हैं।
मेरा नाम भूमेन्द्र बिसेन है। मैं TazaSanket.in का संस्थापक और एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूं। इस पोर्टल के जरिए मैं मध्य प्रदेश, खासकर बालाघाट की विश्वसनीय लोकल खबरें पहुंचाता हूं। डिजिटल पत्रकारिता में मुझे 4 वर्षों का अनुभव है और मेरा उद्देश्य समाज की सच्चाई को उजागर करना है।





