Balaghat Police Employment Fair: जहां गूंजती थीं गोलियां, अब गूंजेगा रोजगार – बालाघाट की नई पहल

Balaghat Police Employment Fair: जहां गूंजती थीं गोलियां, अब गूंजेगा रोजगार – बालाघाट की नई पहल

Balaghat Police Employment Fair: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पर भी रोजगार दिलाने के उद्देश्य से बालाघाट पुलिस ने सराहनीय कदम उठाया है। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के नेतृत्व में 36वीं बटालियन कनकी में 9 से 11 सितंबर तक तीन दिवसीय रोजगार मेला आयोजित किया जा रहा है।

इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि किस तरह यह मेला युवाओं को नौकरी दिला रहा है, इसमें कौन-कौन सी कंपनियां शामिल हुईं और यह पहल नक्सली मानसिकता बदलने में कैसे मददगार साबित हो रही है।

युवाओं के लिए रोजगार और विश्वास का मंच

रोजगार मेले में बहुराष्ट्रीय कंपनियां सीधे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को नौकरी प्रदान कर रही हैं। चयनित युवाओं को सुरक्षित रोजगार, सम्मानजनक वेतन और आधुनिक वातावरण में काम करने का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल उनके भविष्य को सुरक्षित बनाएगी बल्कि समाज में व्याप्त नक्सली विचारधारा को भी कमजोर करेगी। जहां कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, अब वहां रोजगार की गूंज सुनाई दे रही है।

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Balaghat Police Employment Fair: जहां गूंजती थीं गोलियां, अब गूंजेगा रोजगार – बालाघाट की नई पहल

युवाओं की बढ़ती भागीदारी

9 सितंबर को 220 और 10 सितंबर को 200 से अधिक युवक रोजगार मेले में शामिल हुए। लगातार बढ़ती भागीदारी यह साबित करती है कि अब युवाओं का विश्वास शासन और पुलिस पर मजबूत हो रहा है। पुलिस अधीक्षक का कहना है कि यह पहल सिर्फ नौकरी देने तक सीमित नहीं है बल्कि युवाओं को उनके पोटेंशियल से परिचित कराने और उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास है।

भविष्य की योजनाएं और उम्मीदें

पुलिस विभाग का लक्ष्य है कि अगले छह महीनों में हजार से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए। इसके लिए भविष्य में और बड़े रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा। यह पहल आने वाले समय में नक्सल प्रभावित इलाकों को आत्मनिर्भरता और विकास की नई राह पर ले जाएगी।

FAQs: Balaghat Police Employment Fair

प्रश्न 1: बालाघाट में रोजगार मेला कब आयोजित हुआ?

उत्तर: 9 से 11 सितंबर तक तीन दिवसीय मेला आयोजित किया गया।

प्रश्न 2: इस रोजगार मेले का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: नक्सल प्रभावित युवाओं को नौकरी दिलाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना।

प्रश्न 3: कितने युवक इसमें शामिल हुए?

उत्तर: पहले दो दिनों में ही 400 से अधिक युवक शामिल हुए।

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