नमस्कार दोस्तों मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला अपनी प्राकृतिक संपदा, खनिज संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के कारण राज्य में एक खास स्थान रखता है। बालाघाट की सीमाएं महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्यों से मिलती हैं, जिससे यहां की सांस्कृतिक विविधता और भी समृद्ध हो जाती है। इस जिले में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जो प्रकृति प्रेमियों, इतिहास प्रेमियों और आध्यात्मिक यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। आइए, विस्तार से जानते हैं बालाघाट जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के बारे में।
1. कान्हा राष्ट्रीय उद्यान

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है, जिसकी सीमाएं मंडला और बालाघाट जिलों में फैली हुई हैं। यह उद्यान बाघों और लुप्तप्राय बारहसिंघा (हर्ड्स) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। 1955 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया और 1977 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के अंतर्गत शामिल किया गया। बालाघाट से कान्हा के मुखी गेट की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। यहां आप बाघों की झलक, हिरणों की दौड़ और पक्षियों की मधुर चहचहाहट का आनंद ले सकते हैं।
2. लालजी का किला

बालाघाट से करीब 55 किलोमीटर दूर लालजी गांव में स्थित यह प्राचीन किला 12वीं शताब्दी में गोंड राजाओं द्वारा बनवाया गया था। ऊंची दीवारों से घिरे इस किले के चारों कोनों पर बुर्ज बनाए गए थे, जिनमें से दो अब भी सुरक्षित हैं। यह किला लगभग 7 एकड़ में फैला हुआ है। किले के पास काली माता का प्रसिद्ध मंदिर है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
3. गांगुपारा झरना और डैम

गांगुपारा झरना बालाघाट जिला मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर दूर बाहमर गांव के पास स्थित है। यह झरना जंगलों से घिरा हुआ है और इसकी ऊंचाई से गिरता पानी बहुत ही आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करता है। झरने के पास ही गांगुपारा डैम स्थित है, जो सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
4. ड्यूटी डैम

ड्यूटी डैम बालाघाट जिले में लामटा से 10 किलोमीटर दूर वेनगंगा नदी पर स्थित है। यह बालाघाट मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर है। इस डैम का निर्माण अंग्रेजी शासनकाल में 1923 में किया गया था, जिसमें ब्रिटेन से मंगाई गई मशीनों का इस्तेमाल हुआ था। डैम का उद्देश्य आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा प्रदान करना था।
5. गोमजी-सोमजी मंदिर

भरवेली की पहाड़ियों के शिखर पर स्थित गोमजी श्यामजी मंदिर, ज्वाला देवी को समर्पित है। यह मंदिर बालाघाट से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। यहां मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
6. हट्टा की बावली

बालाघाट से करीब 18 किलोमीटर दूर हटा गांव में स्थित हटा की बावली का निर्माण गोंड राजाओं द्वारा 17वीं-18वीं शताब्दी में किया गया था। पत्थरों से निर्मित यह बहुमंजिला बावली आज भी वर्षभर पानी से भरी रहती है और पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।
7. राजीव सागर बांध

राजीव सागर बांध, जिसे 52 डैम या कोडैम भी कहा जाता है, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की संयुक्त परियोजना है। यह बांध कटंगी के पास कुटबा गांव (बालाघाट) और महाराष्ट्र के भंडारा जिले के तुमसर तहसील के पास स्थित है। बांध का निर्माण 130 नदी पर किया गया है, जो दोनों राज्यों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत है।
8. कालीपीठ मंदिर

बालाघाट शहर में स्थित मां काली का यह प्रसिद्ध मंदिर अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि इस मंदिर में माता काली की प्रतिमा स्वयं धरती से प्रकट हुई है और धीरे-धीरे ऊपर आ रही है। नवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
9. कोटेश्वर धाम, लांजी

लालजी के पास स्थित कोटेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसका निर्माण 11वीं-12वीं सदी के बीच पत्थरों से किया गया था। मंदिर की दीवारों पर तराशी गई मूर्तियां खजुराहो की कलाकृतियों की याद दिलाती हैं। श्रावण मास में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
10. रामपायली मंदिर

बालाघाट से 45 किलोमीटर दूर रामपायली में बालाजी का प्रसिद्ध मंदिर है। कहा जाता है कि भगवान राम वनवास के दौरान यहां माता सीता और लक्ष्मण के साथ रुके थे। मंदिर का निर्माण लगभग 600 वर्ष पूर्व भोंसले राजाओं ने करवाया था। यहां एक पत्थर पर भगवान राम के पैरों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं।
11. नेहरा डैम

नेहलेसरा डैम बालाघाट से लगभग 60 किलोमीटर दूर चंदन नदी पर स्थित है। यह डैम लगभग 2 किलोमीटर लंबा है और इसका निर्माण 1968 में हुआ था।
12. रमरमा वाटरफॉल

वारासिवनी तहसील से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित रह वाटरफॉल घने जंगलों और ऊंची-नीची पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां शिव मंदिर भी स्थित है, और शिवरात्रि के अवसर पर यहां मेला लगता है।
बालाघाट के अन्य आकर्षण
बालाघाट शहर के पास बजरंग घाट और बॉटनिकल गार्डन घूमने के लिए बेहतरीन जगहें हैं। इसके अलावा मलांजखंड में एशिया की सबसे बड़ी तांबे की खदान और भरवेली में एशिया की सबसे गहरी मैग्नीज खदान स्थित है, जो इस जिले को विश्व मानचित्र पर एक खास पहचान दिलाती हैं।
मेरा नाम भूमेन्द्र बिसेन है। मैं TazaSanket.in का संस्थापक और एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूं। इस पोर्टल के जरिए मैं मध्य प्रदेश, खासकर बालाघाट की विश्वसनीय लोकल खबरें पहुंचाता हूं। डिजिटल पत्रकारिता में मुझे 4 वर्षों का अनुभव है और मेरा उद्देश्य समाज की सच्चाई को उजागर करना है।





