5000 पेड़ काटे, चारागाह पर कब्जा, बालाघाट के सालेटेका गांव में रातोंरात हुई ‘साजिश’ का ग्रामीणों ने किया खुलासा

5000 पेड़ काटे, चारागाह पर कब्जा, बालाघाट के सालेटेका गांव में रातोंरात हुई 'साजिश' का ग्रामीणों ने किया खुलासा

बालाघाट जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित ग्राम सालेटेका के लगभग एक सैकड़ा ग्रामीणों ने गांव से तिरंगा रैली निकालकर जिला मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच द्वारा बिना ग्राम पंचायत और ग्रामीणों की जानकारी के गांव की शासकीय चारागाह भूमि पर एक राइस मिल स्थापित करने के लिए NOC दे दी गई है। इस निर्णय से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है, क्योंकि चारागाह की भूमि पर उद्योग खुलने से पशुओं के लिए चरने की जगह समाप्त हो जाएगी और ग्राम की शासकीय भूमि भी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

शासकीय भूमि और पर्यावरण संरक्षण की उठाई मांग

ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट किया कि वे ग्राम में इस राइस मिल की स्थापना का विरोध करते हैं। ग्रामवासी चाहते हैं कि यह परियोजना किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाए ताकि ग्राम की चारागाह भूमि, पर्यावरण और पारिस्थितिकी संतुलन सुरक्षित रह सके। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण दिवस के दिन ही बिना किसी सार्वजनिक सूचना के हजारों पेड़ काट दिए गए, बोरिंग की गई और बिजली ट्रांसफार्मर लगा दिया गया।

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बिना अनुमति के एनओसी जारी करने पर नाराजगी

ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच ने ग्राम सभा की सहमति के बिना और पंचायत प्रतिनिधियों को जानकारी दिए बगैर एनओसी जारी की। वार्ड क्रमांक 3 के पंचों ने भी इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ना तो पंचायत की बैठक में यह मुद्दा लाया गया और ना ही आम जनता को सूचित किया गया। यह निर्णय पूरी तरह से मनमाना और असंवैधानिक बताया जा रहा है।

आंदोलन की चेतावनी, मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की तैयारी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि राइस मिल की स्थापना की प्रक्रिया को तत्काल रोका नहीं गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे मुख्यमंत्री तक जाकर अपनी बात रखेंगे और किसी भी स्थिति में ग्राम सालेटेका की शासकीय भूमि पर यह उद्योग स्थापित नहीं होने देंगे।

5000 पेड़ों की कटाई और मुआवजे की मांग

सेवानिवृत्त भारतीय थल सेना के अधिकारी सूबेदार तोरण राडाले ने बताया कि पर्यावरण दिवस के दिन रातोंरात 5000 से अधिक पेड़ों की कटाई कर दी गई, जो पर्यावरण के लिए गंभीर संकट है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2025 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक पेड़ की कीमत एक लाख रुपये के हिसाब से पांच अरब रुपये सरकार के खाते में जमा कराए जाएं और उसी स्थान पर पुनः वृक्षारोपण कर उसे चारागाह के रूप में संरक्षित किया जाए।

इस प्रकार ग्रामीणों ने एक स्वर में मिल का विरोध किया और ग्राम की पर्यावरणीय और सामाजिक संरचना को बचाने की मांग उठाई।

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