मुंबई के वर्सोवा इलाके में स्थित नवाजुद्दीन सिद्दीकी का घर किसी राजसी महल से कम नहीं है। खुद नवाज ने इस घर का डिज़ाइन किया है, और इसमें उनकी थिएटर से जुड़ी यादें, दीवारों पर लगाई गई प्ले की पेंटिंग्स और एक रोमियो-जूलियट टाइप बालकनी इसे और भी खास बनाते हैं। उनका कहना है कि वह घर खरीदने या बनाने के इरादे से मुंबई नहीं आए थे, लेकिन समय और जरूरतों के साथ यह सफर तय हुआ।
बातचीत में झलकता गांव का अपनापन और सादगी
नवाज के साथ हुई बातचीत में उनके अंदर छिपे सरल और जमीनी इंसान की झलक साफ दिखती है। किचन में चम्मच, मूंग दाल और गरम मसाले के बारे में सवालों पर उनका मासूम अंदाज़, और दाल गोश्त बनाकर खिलाने की गर्मजोशी दिल छू जाती है। वे खुलकर बताते हैं कि उन्हें देसी खाना, खासकर दाल गोश्त और बाजरे की रोटी बेहद पसंद है।
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अभिनय के जुनून में जंगलों तक की यात्रा
अपने रोल के लिए वे किस हद तक जाते हैं, इसका उदाहरण ‘रमन राघव’ के किरदार की तैयारी में दिखता है, जहां वे खुद को मानसिक रूप से उस डार्क कैरेक्टर में ढालने के लिए जंगलों में चले गए थे। नवाज मानते हैं कि हर इंसान के भीतर अच्छाई और बुराई दोनों होती है, और अपने किरदारों के जरिए वे खुद को और अपने पूर्वजों के गुणों को खोजने की कोशिश करते हैं।
पिता से जुड़ी यादें और इमोशनल रिश्ता
बातचीत के दौरान जब नवाज अपने पिता को याद करते हैं, तो वह हिस्सा बेहद भावुक हो जाता है। उनका कहना है कि जीवन में जब भी कोई कठिनाई आती है, तब उन्हें अपने पिता की बात याद आती है सब ठीक हो जाएगा।” यही विश्वास उन्हें आज भी आगे बढ़ाता है।
निष्कर्ष
नवाजुद्दीन सिद्दीकी की ज़िंदगी, उनकी सोच, अभिनय और उनकी सादगी एक मिसाल है। उनका घर हो या उनके किरदार, सबमें उनका जुनून और मेहनत साफ दिखता है। यही वजह है कि वह सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन चुके हैं।
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