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केपीएमजी टेलीकॉम रिपोर्ट: एआई निवेश से टेलीकॉम कंपनियों की झोली में आई अरबों की कमाई, जानिए चौंकाने वाले आंकड़े - Taza Sanket

केपीएमजी टेलीकॉम रिपोर्ट: एआई निवेश से टेलीकॉम कंपनियों की झोली में आई अरबों की कमाई, जानिए चौंकाने वाले आंकड़े

दुनियाभर की टेलीकॉम कंपनियां अपने तकनीकी निवेश से जबरदस्त फायदा उठा रही हैं। केपीएमजी इंटरनेशनल की ‘ग्लोबल टेक रिपोर्ट 2026: टेलीकम्युनिकेशंस’ के मुताबिक केपीएमजी टेलीकॉम रिपोर्ट में सामने आया है कि करीब तीन-चौथाई यानी 74 प्रतिशत कंपनियों ने पिछले 12 महीनों में डिजिटल तकनीकों से पांच करोड़ डॉलर से ज्यादा का मूल्य हासिल किया है। जैसे-जैसे एआई अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है और सेक्टर में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन परिपक्व हो रहा है, टेलीकॉम कंपनियां अब मजबूत तकनीकी बुनियाद को बड़े और दोहराए जा सकने वाले कारोबारी नतीजों में बदलने पर ध्यान दे रही हैं।

गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा में मजबूत पकड़

रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियां गवर्नेंस और रणनीति, नेटवर्क और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और एंटरप्राइज डेटा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में लगातार मजबूत क्षमता दिखा रही हैं। हालांकि इसके साथ ही कंपनियों को बढ़ते क्रियान्वयन दबाव, परिचालन जटिलताओं और तकनीक से जुड़े बढ़ते जोखिमों से भी जूझना पड़ रहा है, क्योंकि वे अपनी ट्रांसफॉर्मेशन पहलों को आगे बढ़ा रही हैं।

रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े

प्रमुख निष्कर्षआंकड़ा
अगले 24 महीनों में राजस्व वृद्धि का भरोसा89%
पिछले पांच साल में राजस्व वृद्धि दर्ज करने वाली कंपनियां88%
पिछले 12 महीनों में 5 करोड़ डॉलर या अधिक मूल्य हासिल74%
1 अरब डॉलर या अधिक मूल्य हासिल करने वाली कंपनियां8%
खुद को इनोवेटर या शुरुआती अपनाने वाला मानने वाली कंपनियां47%
खुद को फास्ट फॉलोअर मानने वाली कंपनियां40%
प्रमुख तकनीकी कार्यों में प्रबंधित या अनुकूलित परिपक्वता स्तर82-87%

एआई अपनाने में अभी भी लंबा सफर बाकी

रिपोर्ट के अनुसार 54 प्रतिशत कंपनियों ने रणनीतिक रूप से एआई में निवेश किया है और सक्रिय उपयोग के मामलों से मूल्य हासिल कर रही हैं, लेकिन सिर्फ 22 प्रतिशत कंपनियां ही आज की तारीख में कई उपयोग मामलों में रिटर्न के साथ बड़े पैमाने पर एआई तैनाती कर पाई हैं। हालांकि 76 प्रतिशत कंपनियों को उम्मीद है कि वे अगले 12 महीनों के भीतर इस स्तर तक पहुंच जाएंगी। करीब 88 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि एआई और इंटेलिजेंट तकनीकें उनके कुल डिजिटल मूल्य में 21 से 40 प्रतिशत का योगदान देती हैं।

परिचालन चुनौतियां अभी भी बरकरार

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि परिचालन संबंधी चुनौतियां अब भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं। 77 प्रतिशत कंपनियों ने खराब पूर्वानुमान को और इतनी ही संख्या में कंपनियों ने लागत बनाम गति के बीच तालमेल को नतीजों पर नकारात्मक असर डालने वाला कारक बताया। वहीं 65 प्रतिशत कंपनियों को पर्याप्त प्रायोजन या फंडिंग हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

परिचालन चुनौतीप्रभावित कंपनियां
खराब पूर्वानुमान77%
लागत बनाम गति का तालमेल77%
पर्याप्त फंडिंग की कमी65%

वर्कफोर्स ट्रांसफॉर्मेशन में भी तेजी

कार्यबल में बदलाव की रफ्तार भी तेज हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 91 प्रतिशत कंपनियां हाइब्रिड ह्यूमन-डिजिटल वर्कफोर्स को सहयोग देने के लिए एजेंटिक एआई में निवेश कर रही हैं, जबकि 83 प्रतिशत कंपनियां अपनी टैलेंट भर्ती रणनीति में एआई-नेटिव कौशल को शामिल कर रही हैं।

भारतीय टेलीकॉम सेक्टर के लिए बड़ा मौका

केपीएमजी इंडिया में टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन और एआई के प्रमुख पुरुषोत्तमन केजी ने कहा कि रिपोर्ट यह दिखाती है कि टेलीकॉम कंपनियां अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही हैं, जहां बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन ही सबसे बड़ा अंतर पैदा करने वाला कारक है। उनके मुताबिक भारत का टेलीकॉम सेक्टर, जो डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीक अपनाने में हमेशा आगे रहा है, अब उसके सामने गवर्नेंस, जोखिम और कार्यबल की तैयारी में संतुलन बनाते हुए एआई को जिम्मेदारी से बड़े स्तर पर लागू करने, पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने और डेटा-आधारित परिचालन को मजबूत करने का अवसर है।

आगे की राह: अगले 12 महीनों में तेज होगी रफ्तार

आने वाले समय में यह सेक्टर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में अपनी अगुवाई की स्थिति बनाए रखने की उम्मीद कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अगले 12 महीनों के भीतर 66 प्रतिशत टेलीकॉम कंपनियों में एआई और ऑटोमेशन पूरी तरह से बड़े पैमाने पर लागू हो जाने की उम्मीद है। इसके अलावा साइबर सुरक्षा (63 प्रतिशत), क्लाउड/एक्सएएएस (58 प्रतिशत) और एज कंप्यूटिंग (54 प्रतिशत) में भी उच्च स्तर की तैनाती होने का अनुमान है।

तकनीक12 महीनों में बड़े पैमाने पर तैनाती की उम्मीद
एआई और ऑटोमेशन66%
साइबर सुरक्षा63%
क्लाउड/एक्सएएएस58%
एज कंप्यूटिंग54%

रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि जो कंपनियां तकनीकी महत्वाकांक्षा को अनुशासित क्रियान्वयन, मूल्य मापन और जोखिम प्रबंधन के साथ जोड़ पाएंगी, वे ही डिजिटल निवेश को दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धी बढ़त में बदल पाने में सबसे आगे रहेंगी।

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